अब तक 3287 मरीज ठीक हुए, प्लाज्मा देने सिर्फ 20 ही पहुंचे कोरोना से स्वस्थ लोग प्लाज्मा डोनेट करें तो बच सकती हैं जानें
रक्तदान-देहदान में अग्रणी हमारे शहर जोधपुर में कोरोना संकट के दौर में अब पॉजिटिव से नेगेटिव हुए लोग खुद आगे आकर प्लाज्मा का दान करें, ताकि इससे किसी की जान बचाई जा सके। अभी तक इसे लेकर लोग कम जागरूक हुए हैं।
तभी तो शहर में अब तक 3287 कोरोना पॉजिटिव मरीज नेगेटिव होकर घर जा चुके हैं, लेकिन इनमें से महज 20 लोग ही प्लाज्मा देने पहुंचे हैं। अस्पतालों में अभी प्लाज्मा की कमी है और कोरोना का इलाज कर रहे डॉक्टर्स भी प्लाज्मा देने की लगातार अपील कर रहे हैं।
यह प्लाज्मा कोरोना के गंभीर मरीजों के इलाज में कारगर है और सबसे खास बात यह है कि यह प्लाज्मा हमारे शरीर में केवल 24 घंटे में ही दुबारा बन जाता है और इसको डोनेट करने से शरीर पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है। इसका प्रमाण है कि अब तक प्लाज्मा डोनेट कर चुके कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हुए लोग बिल्कुल स्वस्थ हैं। इसलिए घबराएं नहीं, कोरोना के जो मरीज ठीक हो चुके हैं, वे प्लाज्मा का दान करें, ताकि अन्य मरीजों की जान बचाई जा सके।
विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि शहर में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं। चिंता इस बात की है कि अब लक्षण वाले मरीज भी आ रहे हैं। दुनिया भर में अभी तक इस मर्ज की दवा नहीं बनी है। कुछ जगह शोध में सामने आया है कि यदि कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हो चुके मरीज का प्लाज्मा पॉजिटिव मरीज को चढ़ाया जाए तो उसकी हालत में जल्दी सुधार देखा गया है।
खून में से निकाला गया पानी तत्व है प्लाज्मा इसको देने से किसी तरह का नुकसान नहीं
एमडीएमएच ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जीसी मीणा ने बताया कि प्लाज्मा शरीर में बहने वाले खून का ही एक भाग है। खून में से पानी के तत्व को बाहर निकाला जाता है, जिसे प्लाज्मा कहते हैं। इसको डोनेट करने से कोई नुकसान नहीं होता है। प्लाज्मा वहीं मरीज दे सकता है जो कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हो चुका है, यानी जिसमें कोरोना से लड़ने की एंटी बॉडी बन चुकी है।
एम्स ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अर्चना वाजपेयी ने बताया कि खून में 45 प्रतिशत सेल और 55 प्रतिशत पानी होता है। इसको एफेरेसिस मशीन द्वारा सिंगल डोनर प्लेटलेट निकालने की विधि से ही निकाला जाता है। इसमें खून से पानी वाले तत्व निकालकर खून मरीज को वापस चढ़ा दिया जाता है और 24 घंटे में फिर शरीर में उतना ही प्लाज्मा बन जाता है।
वहीं एमडीएम मेडिसिन विभाग में कार्यरत डॉ. मोहित कक्कड़ ने बताया कि मैं भी कोरोना मरीजों को देखते हुए पॉजिटिव हुआ और बाद में ठीक होकर फिर मरीजों को देख रहा हूं। मरीजों के इलाज में सहयोग के लिए मैंने भी प्लाज्मा दिया और इससे मुझे कोई शारीरिक दुष्प्रभाव नहीं हुआ।
15-20 मरीजों को चढ़ाया जा चुका है
एम्स और एमडीएम में भर्ती कोरोना मरीजों में से 15-20 को ही प्लाज्मा चढ़ाया है। हालांकि सभी को आवश्यकता नहीं होती है। जो मरीज कॉमाेबिड और लक्षण के साथ भर्ती हैं, उन्हीं को थैरेपी दी जा रही है। वर्तमान में कोरोना के 1100 एक्टिव केस हैं। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के एमडीएमएच और एमजीएच में भर्ती 10 से अधिक को थैरेपी दी जा चुकी है।
यही अनुपात एम्स में भर्ती मरीजाें का भी है। मेडिसिन विभाग अध्यक्ष डॉ. श्याम माथुर ने बताया कि अभी ट्रायल स्टडी की जा रही है। कुछ में अच्छे परिणाम भी मिले हैं, लेकिन समस्या यह कि अभी प्लाज्मा सीमित है, इसलिए कोरोना से ठीक हो चुके मरीज प्लाज्मा डोनेट कर इस वैश्विक लड़ाई में सहयोग करें।
प्रशासन तैयार... हाईरिस्क बुजुर्गों को बचाने घर-घर जा रही टीम, स्वास्थ्य व ऑक्सीजन जांच कर सैंपल ले रही
जोधपुर| शहर के हाईरिस्क वाले बुजुर्गों काे बचाने के लिए मिशन जीवनरक्षा के तहत मेडिकल टीमों ने घर-घर दस्तक का अभियान शुरू किया है। हाईरिस्क में क्रॉनिक डिजीज यानी कार्डियक, हाइपरटेंशन, कैंसर, सांस में तकलीफ व यूरीन की बीमारियां हैं। 646 टीमें बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच कर सैंपल ले रही है। गंभीर बुजुर्गांे को अस्पताल शिफ्ट कर रहे हैं। रोजाना 4 हजार से ज्यादा सैंपल में से 2500 से ज्यादा बुजुर्गों के हैं। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सवा लाख बुजुर्गों की सैंपलिंग व स्वास्थ्य जांच होगी।
पहले ऑक्सीजन लेवल की जांच फिर सैंपलिंग
हर टीम में एक बीएलओ व मेडिकल कर्मी शामिल हैं। डॉ. हिना अाफताब ने बताया कि सबसे पहले पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की जांचते हैं। कम ऑक्सीजन लेवल पर तुरंत मेडिकल सहायता दी जा रही है। सैंपलिंग भी की जा रही हैं। नागौरी गेट डिस्पेंसरी प्रभारी डॉ. वसीम अकरम व डॉ. मोहम्मद साजिद ने हार्डकोर सर्वे शुरू किया है। बुजुर्गों के साथ सुपर स्प्रेडर की जांच करवा रहे हैं।
हाईरिस्क वाले मरीज चिह्नित, आगे की रणनीति में कारगर : प्रशासन की ओर से घर-घर बीएलओ व स्वास्थ्य कर्मी भेज करवाए सर्वे से कई तरह के डेटा मिले थे। इस आधार पर प्रशासन ने हाईरिस्क वाले 35 हजार से ज्यादा बुजुर्ग चिह्नित किए। इनके संक्रमित मिलने पर उनके साथ रहने वालों का पहले उपचार होगा, जिससे संक्रमण ज्यादा नहीं फैले। वहीं भविष्य की रणनीति बनाने में ये डेटा कारगर साबित होंगे।
- न्यू कोहिनूर बापू कॉलोनी निवासी 37 साल के मोहम्मद इमरान ने बताया कि वे मई के अंतिम सप्ताह में पॉजिटिव आए। 10 दिन बाद पॉजिटिव से नेगेटिव होने पर डिस्चार्ज होकर घर गए। फिर जून में एम्स में जाकर प्लाज्मा डोनेट किया। कोई समस्या नहीं आई। मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं। यदि प्लाज्मा देने से किसी की जान बचती है तो इससे अच्छा कोई दान नहीं।
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