राजस्थान में लगातार बढ़ते काेराेना मरीजाें के बीच राज्य के सियासी क्वाॅरेंटाइन की 14 दिन की अवधि 24 जुलाई काे ही पूरी हाेने वाली है। हाईकाेर्ट ने इसी तारीख तक के लिए अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है- क्या प्रदेश के लगभग 120 विधायक, मंत्री बाड़े से डिस्चार्ज हाेंगे? या फिर सियासत में संक्रमण के खतरे के चलते उनके क्वाॅरेंटाइन की अवधि काे बढ़ाना पड़ेगा। ब्यूराेक्रेसी से लेकर हर किसी की निगाह अब हाईकाेर्ट के फैसले पर ही टिकी हुई है।
हाईकाेर्ट द्वारा अपना फैसला सुरक्षित रखने से गहलाेत-पायलट दोनों ही गुट के विधायकाें की 24 जुलाई तक बाड़ाबंदी तय मानी जा रही है। मुख्यमंत्री तो विधायकों को यह संकेत दे भी चुके हैं। प्रदेश में 12 जुलाई से पायलट गुट के विधायक सरकार को अल्पमत बताते हुए प्रदेश की सीमा से बाहर हाेटलाें में बाड़ेबंदी के तहत रह रहे हैं, जबकि 13 जुलाई से गहलाेत के समर्थक विधायक सरकार को बचाने के लिए दिल्ली रोड पर होटल में रह रहे हैं।
दाेनों ही गुट विधायकाें काे बाहर निकालने में कतरा रहे
गहलाेत और पायलट गुट दाेनाें ही अपने विधायकाें काे बाहर निकालने में कतरा रहे हैं। दाेनों गुटाें काे ये डर सता रहा है कि कहीं उनके विधायक दूसरा गुट ताेड़कर नहीं ले जाए। ये ही वजह है कि कई विधायकाें के फाेन तक जब्त किए जा चुके हैं। उन्हें बाहर की दुनिया से बात करने की मनाही है। चर्चा है- सरकार के स्तर पर कई विधायकाें और नेताओं के फाेन टेप कराएं जा रहे हैं।
जांच एजेंसियाें का गलत उपयाेग
दाेनाें गुटाें के नेताओं पर केंद्र की और राज्य स्तर की जांच एजेंसियाें ने भी पहरे बिठा रखे हैं। पिछले दिनों गहलाेत गुट पर आयकर विभाग और ईडी ने कार्रवाई की थी। विधायक कृष्णा पूनियां से भी सीबीआई ने तीन घंटे पूछताछ की है। उधर, एसओसी भी हाॅर्सस ट्रेडिंग के ऑडियाे केस में हरियाणा तक विधायकाें से पूछताछ के लिए गई थी, लेकिन विधायक नहीं मिले थे और एसओजी काे खाली हाथ लाैटना पड़ा था।
बयानाें की जंग : गहलाेत-पायलट गुटाें के बीच बयानाें की जंग का दाैर जारी है। गहलाेत या उनके खेमे के बड़े नेता का बयान आने के बाद पायलट या उनके गुट के भी वरिष्ठ नेता का बयान काउंटर में जारी हाे रहा है। पहले गहलाेत गुट का बयान आता है, फिर पायलट गुट का।
दिल्ली रोड की होटल का रोजाना का खर्च 12 लाख, मानेसर होटल का 11 दिन का बिल 25 लाख
कांग्रेस सरकार के दोनों खेमे होटल से सियासत व संगठन चला रहे हैं। पिछले 11 दिनों से होटल से ही सारी गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यहां तक की विधायक दल की बैठक से लेकर मंत्रियों के दफ्तर के काम भी बाड़ाबंदी के बीच ही निबटाए जा रहे हैं। सचिन पायलट खेमा मानेसर की पांच सितारा होटल में है। बाहर हरियाणा पुलिस का पहरा है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पक्ष में दिल्ली रोड की होटल में मंत्री, विधायक व केंद्रीय संगठन के पदाधिकारी हैं। सुबह योगा से सरकार जागती है और रात को मनोरंजन के लिए विधायकों को फिल्म दिखाई जाती है। ब्रेक फास्ट, लंच, हाई टी और डिनर सब कुछ होटल में ही हो रहा है।
क्वॉरेंटाइन खर्च (अनुमानित) होटल फेयरमोंट (गहलोत खेमा)
पिछले 10 दिन में 1.20 करोड़ खर्च हो चुके
12 लाख रोजाना खर्च हो रहा है। यहां सरकार ने 120 कमरे बुकिंग करवाए हुए हैं। विधायक 109 बताए जा रहे हैं और शेष केंद्रीय नेतृत्व व गुप्त मंत्रणा के लिए हैं। सारी जिम्मेदारी मुख्य सचेतक महेश जोशी के जिम्मे हैं।
रोजाना अनुमानित 10 हजार एक कमरे का खर्च हैं, जिसमें सुबह की चाय, निंबू पानी, काढ़ा के साथ सुबह की शुरुआत होती है। इसके बाद ब्रेक फास्ट, लंच, हाई टी व डिनर भी शामिल हैं।
पिछले 11 दिन में ~25 लाख का बिल बना है
मानेसर होटल (पायलट खेमा) रोज ढाई लाख रु. खर्च हो रहे हैं। 22 कमरे बुकिंग करवाए गए हैं, विधायक करीब 19 ही रुके हुए बताए हैं, शेष तीन कमरे विशेष मंत्रणा के लिए व अन्य लोगों के लिए हैं।
रोजाना 11 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। जिसमें कमरे के अलावा सुबह की चाय, ब्रेक फास्ट, लंच, हाई टी व डिनर आदि शामिल हैं।
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