डीग में हुए बहुचर्चित राजा मानसिंह हत्याकांड का फैसला करीब 35 साल बाद अब 21 जुलाई को आने की उम्मीद है। इस केस की सुनवाई कर रही मथुरा की अदालत ने अब फैसले तारीख तय की है। इस केस में अब तक 1700 से ज्यादा तारीखें पड़ने के साथ ही 8 बार फाइनल बहस भी हो चुकी है।
राजा मानसिंह की बेटी एवं पूर्व पर्यटन मंत्री कृष्णेंद्र कौर दीपा के आग्रह पर यह मामला उत्तर प्रदेश की मथुरा न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले में अब तक 8 बार फाइनल बहस हो चुकी है। इसके साथ ही 1700 से ज्यादा तारीखें पड़ चुकी हैं। इस मामले की पैरवी कर रहे पूर्व पर्यटन मंत्री के पुत्र दुष्यंतसिंह ने फैसले की तारीख 21 जुलाई होने की पुष्टि की है।
उल्लेखनीय है कि 20 फरवरी 1985 को विधानसभा चुनाव के दौरान किले में ध्वज हटाने को लेकर विवाद हा़े गया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर डीग में जनसभा करने के लिए आए हुए थे। कांग्रेस समर्थकों ने राजा मानसिंह के झंडे को हटाकर कांग्रेस का झंडा लगा दिया, जो उन्हें नागवार गुजरा।
राजा मानसिंह ने जोंगा की टक्कर से पहले सभा मंच तोड़ा, फिर हेलीकॉप्टर
पुलिस की एफआईआर के मुताबिक राजा मानसिंह ने चौड़ा बाजार में लगे सभा मंच को जोंगा की टक्कर से तोड़ दिया था। इसके बाद वे हायर सैकंडरी स्कूल पहुंचे और वहां खड़े सीएम माथुर के हैलीकॉप्टर को जोंगा से टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। उस वक्त सीएम माथुर बाजार में जनसंपर्क कर रहे थे। इस मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई। अगले दिन अनाज मंडी में पुलिस ने जीप को जोंगा के आगे लगा दिया।
जब राजा मानसिंह जोंगा को बैक करने लगे तभी फायरिंग हुई। इसमें राजा मानसिंह, सुमेरसिंह और हरिसिंह को गोली लगी, जिनकी मौत हो गई। जोंगा में सवार अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया गया। बाद में यह मामला राजनीतिक रूप से काफी तूल पकड़ गया था।
राज्य सरकार ने इसकी सीबीआई जांच कराने की घोषणा की। इसमें राजा मानसिंह के दामाद विजयसिंह की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसमें तत्कालीन डीएससी कानसिंह भाटी, एसएचओ वीरेंद्रसिंह सहित एसआई रविशेखर मिश्रा, सुखराम, जीवनराम, हरीसिंह, शेरसिंह, छत्तरसिंह, पदमाराम, जगमोहन, हरिकिशन, गोविंद प्रसाद, नेकीराम, सीताराम और कुलदीप को आरोपी बनाया गया।
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