मेवाड़ को 18 साल बाद युवा कांग्रेस की कमान

प्रदेश में हुए बड़े सियासी ड्रामे के बीच डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा काे युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। 18 साल बाद मेवाड़ काे युवा कांग्रेस की कमान मिली है। इससे पहले रघुवीर मीणा 1997 से 2002 तक यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं। तब वे भी विधायक थे।

गहलाेत सरकार से बगावत कर रहे सचिन पायलट का साथ दे रहे युवा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष मुकेश भाकर काे मंगलवार काे पद मुक्त कर संगठन ने गणेश घोघरा काे यह जिम्मेदारी दी है। उनकी नियुक्ति काे आदिवासी बेल्ट में भारतीय ट्राइबल पार्टी की राह राेकने की कवायद से जाेड़कर भी देखा जा सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मेवाड़ में बीटीपी एकाएक सक्रिय हुई थी और उसके दाे विधायक भी बन गए थे।

तब से उदयपुर सहित मेवाड़ में बीटीपी लगातार सक्रिय है। आदिवासी युवाओं का झुकाव भी बीटीपी की तरफ बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि स्थानीय आदिवासी विधायक काे ही युवा टीम की कमान सौंपकर कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। घोघरा को युवा टीम की कमान सौंपने से बीटीपी की तरफ भाग रहा आदिवासी युवा फिर से कांग्रेस का रुख कर सकता है।

छोटे से गांव से आते हैं घोघरा

डूंगरपुर के मझोला (रामपुर सती) नाम के छोटे से गांव में बड़े हुए घोघरा ने विधानसभा चुनाव में डूंगरपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी काे 27 हजार 898 वाेट के अंतर से हराया था। चुनावी मुकाबले में भाजपा के एक बागी अाैर बीटीपी सहित यहां 7 प्रत्याशी मैदान में थे।

इधर रघु को प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनाने से समर्थकों में मायूसी

गाेविंद सिंह डाेटासरा को जिम्मेदारी देने के बाद सीडब्ल्यूसी सदस्य और गहलाेत के करीबी रघुवीर सिंह मीणा काे कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाए जाने की कई दिनाें से चल रही अटकलाें पर विराम लग गया। इसे कांग्रेस की साेशल इंजीनियरिंग के रूप में देखा जा रहा है।

इस घाेषणा के साथ ही मेवाड़ और खासकर उदयपुर में रघु समर्थकाें काे निराशा हाथ लगी है। इस मामले में मीणा का कहना है कि राजनीति में फैसले परिस्थिति अनुसार हाेते हैं। परिस्थितियां जाे कहती हैं, उसके मुताबिक फैसले लेने पड़ते हैं।



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