बीकानेर म्यूजियम में 1000 ताम्रपत्र बांचेंगे मेवाड़ की शौर्य गाथा, यहां हैं मोकल से लेकर आखिरी महाराणा तक के फरमान और परवाने
राजस्थान राज्य अभिलेखागार के बीकानेर स्थित मुख्यालय में देश का अपनी तरह का पहला म्यूजियम तैयार है। इसकी दीर्घाओं में रियासत काल के सवा तीन सौ से ज्यादा फरमान, राजशाही आदेशों समेत ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। निदेशक डा. महेंद्र खड़गावत ने बताया कि 20 हजार स्क्वायर फीट पर बना यह म्यूजियम पर्यटकों और विजिटर्स को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास, प्रशासनिक व्यवस्था, फरमान, वकील रिपोर्ट, अखबारात समेत राजपूताने की हर अनकही कहानी बताएगा। सबसे खास मेवाड़ के ऐतिहासिक एक हजार ताम्र पत्रों की दीर्घा है।
हर दीर्घा खास, हर छह महीने में बदले जाएंगे दस्तावेज, पर्यटक-शोध छात्र ले सकेंगे अपडेट
म्यूजियम में दस्तावेज दीर्घा, टेस्सीटोरी दीर्घा, प्रदर्शनीय दीर्घा और संरक्षण प्रयोगशाला भी बड़े आकर्षण हैं। दस्तावेज दीर्घा में सन 1620 से लेकर 1920 तक के फरमान, दस्तावेज, वकील रिपोर्ट, अखबार, औरंगजेब का पंजा आदि ऐतिहासिक दस्तावेज अंकित हैं। लुइगी पीओ टेस्सीटोरी दीर्घा में 1914 से 1915 तक बीकानेर में रहकर राजस्थान के इतिहास का अध्ययन करने वाले लुइगी पीओ टेस्सीटोरी का विवरण है।
प्रदर्शनीय दीर्घा में 1857 के संग्राम में राजस्थान की भूमिका का उल्लेख है। दीर्घा में हर 6 माह में दस्तावेजों को बदला जाएगा। आखिरी दीर्घा संरक्षण प्रयोगशाला में राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी है। इनके अलावा विभिन्न रियासतों के परवाने-पट्टे, मिसलें आदि भी आमजन को राजपूताने के इतिहास से वाकिफ करवाएंगे। डॉ. खड़गावत का कहना है कि ये जानकारियां शोध छात्रों के लिए भी फायदेमंद होंगी।
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